UPSC UPPCS आदि की तैयारी करने वालों के जीवन में ताने


इस दुनिया में विभिन्न तरह के लोग रहते हैं। कोई अच्छा कोई बुरा कोई संत कोई शैतान आप गिनती भी नहीं कर सकते इतने किस्म की प्रजातियां संसार में निवास करती हैं।
लेकिन एक प्रतियोगी के जीवन में  केवल और केवल दो तरह के लोग ही रहते हैं।
1- आपका कितना भी बुरा दिन हो आपको उत्साहित करने वाले।
2- आप कितना भी बेहतरीन कार्य करें यहाँ तक कि परीक्षा में उच्च स्थान भी प्राप्त कर लें कमी निकाल ही देंगे और आप दो कदम आगे जाएँगे वह आपको दस कदम पीछे ढकेल देंगे वह भी आपको ताना मार मार कर।
पहले वाले लोगों को शत-शत नमन्

बात करनी है दूसरे किस्म के लोगों की।
इस तरह के लोग वास्तव में तो एक भी गुण अर्जुन की भाँति नहीं रखते लेकिन अपने अवगुणों को अर्जुन के गुणों के समकक्ष  अवश्य बना लिया है। इनका लक्ष्य इन्हें साफ साफ दिखता है आपको किसी भी कीमत में ताने मारना।
इनके तरकश में एक से बढकर एक तीर रहते हैं आप पर प्रहार करने के लिए।
यह ऐसे लोग होते हैं जो निरन्तर आपको पीछे करना चाहते हैं।
यह आपके मित्र
आपके शत्रु
यहाँ तक कि आपके सगे सम्बन्धी भी हो सकते हैं।

इनकी खुशी आपकी असफलता में नहीं बल्कि आपकी हताशा में होती है।आप जितना परेशान होते हैं इन्हें उतना ही आनन्द आता है ।
खैर इनकी तारीफ करने बैठें तो ग्रंथ लिखा जा सकता है इसलिए बस करता हूँ।
बहुत से लोग इनकी बातों पर ध्यान नहीं देते लेकिन बहुत अधिक संख्या ऐसे लोगों की है जिनके कानों से इनकी शूल जैसे शब्दों की चुभन आसानी से नहीं जाती।
ऐसे में वह मित्र क्या करें?
सबसे बडी बात तो यह कि आपको अपना व्यक्तित्व ऐसा बनाना चाहिए कि आप प्रकृति को अपना गुरु मान लें और इस संसार की हर वस्तु हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने का प्रयास करें भरोसा रखें खाली हाथ नहीं लौटेंगे कहीं से भी।
बिना चुनौती का सामना किए आप कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते विशेषकर प्रतियोगी जीवन में। ईश्वर ने ऐसे लोगों को आपकी चुनौती के रूप में सृजित किया है अतः इनको स्वीकार लीजिये।
आपको इनकी बातों को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए।
याद रखिए साइकिल की पहिए में हवा डालने के लिए पम्प में जोर लगाया जाता है यह आपके साइकिल रूपी जीवन में हवा भरने वाले लोग हैं।
लोहे को मनचाहे रूप में ढालने के लिए उसे हथौड़े की चोट से गुजरना ही पडता है ।
और आपको आपके मनचाहे रूप में आने के लिए इनके हथौड़ों का सामना करना होगा।
आप खुशी-खुशी कहिए कि मारों भैया चोट तुम जितना मारोगे मैं अपने मनचाहे रूप मे आता जाऊँगा।

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