UPSC में अंग्रेजी का बोलबाला क्यों

UPSC में अंग्रेजी का बोलबाला क्यों?


हर बार की तरह इस बार भी एक अनचाहा लेकिन जाना पहचाना मुद्दा सिर उठाकर आ गया ।
हिन्दी माध्यम या अंग्रेजी माध्यम?
अंग्रेजी माध्यम का ही बोलबाला रहता है संघ लोक सेवा आयोग के अन्तिम परिणाम में।
ऐसा क्यों होता है पहले यह जान लीजिये समझ लीजिये फिर किसी निष्कर्ष पर पहुंचिए।
हिन्दी माध्यम के सरकारी या अर्ध सरकारी विद्यालय अपने पतन की ओर निरन्तर अग्रसर हैं और हिन्दी माध्यम के निजी विद्यालय बस खानापूर्ति में व्यस्त हैं। ऊपर से पुरातन पाठ्यक्रम में पढाई करवाई जाती है ।
हिन्दी माध्यम के पाठ्यक्रम में छात्र छात्राओं के व्यक्तित्व विकास, उनके सोचने की क्षमता, अभिव्यक्ति करने का विकास नहीं किया जाता । जो सिविल सेवा की परीक्षा के अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग हैं।
इसके उलट अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय बचपन से ही बच्चों के व्यक्तित्व एवं अन्य सोपानों का विकास करने की तरफ पढाई से अधिक ध्यान देते हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता की बात करें तो इस कड़ी का मुख्य शिक्षक होता है एक शिक्षक चाहे तो कुछ भी कर सकता है लेकिन सच यह है कि वह करना नहीं चाहता।
सरकारी शिक्षक केवल और केवल अच्छे वेतनमान और एक सुरक्षित जीवन के लिए नौकरी चाहता है जबकि निजी हिन्दी माध्यम के विद्यालय शिक्षकों का वेतन के संबंध में कितना शोषण करते हैं यह बात छुपी हुई नहीं है अधिकतम वेतन 5000 तक ही होता है जो वर्तमान जीवनशैली की पूर्ति नहीं कर सकता ऐसे में वह अपना अतिरिक्त कौशल दिखाने की बजाए बस विद्यालय प्रशासन के निर्देशों का पालन ही करते हैं ।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि अधिकांश निजी विद्यालय प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति से कतराते हैं और ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति करते हैं जो स्वयं स्नातक कर रहे होते हैं या अपना जीवन-निर्वाहन करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में आए हों।
बात करें अंग्रेजी माध्यम की तो वहाँ पर शिक्षक अच्छे वेतनमान पर नियुक्त किए जाते हैं। साथ ही यह स्पष्ट निर्देश रहता है कि शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।

अंग्रेजी माध्यम का ही बोलबाला रहने का एक कारण यह भी है कि आज के समय में अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों की संख्या अपेक्षाकृत कहीं अधिक है हर दूसरा व्यक्ति अपने बच्चों को कान्वेंट शिक्षा दिलाना चाहता है धनवान लोगों की बात छोड़ दीजिये गरीब व्यक्ति भी अपना पेट काटकर ही सही लेकिन अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में ही पढाता है यह पिछले दो दशकों से होता चला आ रहा है।
आप स्वयं अपने क्षेत्र का भ्रमण कर इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि गली गली में अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय ही आपको मिलेंगे जो दो दशक पहले नहीं हुआ करता था।

अंत में यही कहना चाहूँगा कि माध्यम से कोई भी फर्क नहीं पडता। आपको बस यह देखना चाहिए कि आप अपनी बात किस माध्यम से अच्छी प्रकार कर सकते हैं।

हिन्दुस्तान भेडिया दसान की कहावत सत्य साबित मत करिए।
वही करिए जो आपका दिल बोले।

नोट:-
यह मेरे निजी विचार हैं किसी की भावनाओं को आहत करना इस पोस्ट का उद्देश्य बिल्कुल भी नहीं है
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UPSC UPPCS आदि की तैयारी करने वालों के जीवन में ताने


इस दुनिया में विभिन्न तरह के लोग रहते हैं। कोई अच्छा कोई बुरा कोई संत कोई शैतान आप गिनती भी नहीं कर सकते इतने किस्म की प्रजातियां संसार में निवास करती हैं।
लेकिन एक प्रतियोगी के जीवन में  केवल और केवल दो तरह के लोग ही रहते हैं।
1- आपका कितना भी बुरा दिन हो आपको उत्साहित करने वाले।
2- आप कितना भी बेहतरीन कार्य करें यहाँ तक कि परीक्षा में उच्च स्थान भी प्राप्त कर लें कमी निकाल ही देंगे और आप दो कदम आगे जाएँगे वह आपको दस कदम पीछे ढकेल देंगे वह भी आपको ताना मार मार कर।
पहले वाले लोगों को शत-शत नमन्

बात करनी है दूसरे किस्म के लोगों की।
इस तरह के लोग वास्तव में तो एक भी गुण अर्जुन की भाँति नहीं रखते लेकिन अपने अवगुणों को अर्जुन के गुणों के समकक्ष  अवश्य बना लिया है। इनका लक्ष्य इन्हें साफ साफ दिखता है आपको किसी भी कीमत में ताने मारना।
इनके तरकश में एक से बढकर एक तीर रहते हैं आप पर प्रहार करने के लिए।
यह ऐसे लोग होते हैं जो निरन्तर आपको पीछे करना चाहते हैं।
यह आपके मित्र
आपके शत्रु
यहाँ तक कि आपके सगे सम्बन्धी भी हो सकते हैं।

इनकी खुशी आपकी असफलता में नहीं बल्कि आपकी हताशा में होती है।आप जितना परेशान होते हैं इन्हें उतना ही आनन्द आता है ।
खैर इनकी तारीफ करने बैठें तो ग्रंथ लिखा जा सकता है इसलिए बस करता हूँ।
बहुत से लोग इनकी बातों पर ध्यान नहीं देते लेकिन बहुत अधिक संख्या ऐसे लोगों की है जिनके कानों से इनकी शूल जैसे शब्दों की चुभन आसानी से नहीं जाती।
ऐसे में वह मित्र क्या करें?
सबसे बडी बात तो यह कि आपको अपना व्यक्तित्व ऐसा बनाना चाहिए कि आप प्रकृति को अपना गुरु मान लें और इस संसार की हर वस्तु हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने का प्रयास करें भरोसा रखें खाली हाथ नहीं लौटेंगे कहीं से भी।
बिना चुनौती का सामना किए आप कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते विशेषकर प्रतियोगी जीवन में। ईश्वर ने ऐसे लोगों को आपकी चुनौती के रूप में सृजित किया है अतः इनको स्वीकार लीजिये।
आपको इनकी बातों को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए।
याद रखिए साइकिल की पहिए में हवा डालने के लिए पम्प में जोर लगाया जाता है यह आपके साइकिल रूपी जीवन में हवा भरने वाले लोग हैं।
लोहे को मनचाहे रूप में ढालने के लिए उसे हथौड़े की चोट से गुजरना ही पडता है ।
और आपको आपके मनचाहे रूप में आने के लिए इनके हथौड़ों का सामना करना होगा।
आप खुशी-खुशी कहिए कि मारों भैया चोट तुम जितना मारोगे मैं अपने मनचाहे रूप मे आता जाऊँगा।

इतिहास की तैयारी कैसे करें

इतिहास की तैयारी कैसे करें

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि इतिहास विषय को तीन भागों में बांटा गया है
1- प्राचीन इतिहास
2- मध्यकालीन इतिहास
3- आधुनिक इतिहास
मेरे विचार से अध्ययन की दृष्टि से इतिहास को चार भाग में बांट लीजिए चौथा भाग है स्वतंत्रता संग्राम का ।
अक्सर लोग इसे आधुनिक इतिहास से ही पढते हैं यह कई तथ्यों को आपसे दूर रखता है इसलिए इसका अलग अध्ययन करें।

प्राचीन इतिहास

प्राचीन इतिहास में क्या महत्वपूर्ण है और हमें किन बातों को छोड़ देना चाहिए।
प्राचीन इतिहास से प्रश्नों की संख्या काफी कम होती है जबकि पढने के लिए बहुत कुछ है।
आइए देखते हैं
पाषाण काल को छोड़ सकते हैं
सिन्धु सभ्यता से एक भी चीज को छोडना घातक हो सकता है
वैदिक काल को ठीक से देखना होगा एक प्रश्न निश्चित है । विशेष तौर पर बुद्ध और उनसे सम्बन्धित सभी तथ्य।
भारत के महान शासकों में से एक सम्राट अशोक मौर्य वंश से सम्बन्धित हैं अतः मौर्य वंश और मौर्योत्तर काल दोनों पर ही ध्यान देना होगा।
यही बात गुप्त वंश के सम्बंध में भी कहुँगा।
दक्षिण भारत के साम्राज्य और उनके वंश आप छोड़ नहीं सकते एक दो प्रश्न निश्चित ही 24 सितम्बर को आपके सामने आने वाले हैं इसके लिए कोई विकल्प नहीं है। चोल वंश से लेकर संगम युग तक सभी को देखें।
प्राचीन इतिहास के सभी Era के आर्थिक एवं राजनीतिक पक्षों को ध्यान से पढिए किसने कौन सा सिक्का चलाया सिक्के पर क्या छपा था, छपी छवि का क्या अर्थ था, किस वंश में कौन किसकी पूजा और क्यों करता था , किसने क्या बनवाया क्यों बनवाया , कौन किसी वंश का संस्थापक था कौन किसके वंश का समकालीन था ।
और भी बहुत कुछ है जो पढना है बस यह ध्यान में रखकर पढना है कि
कब , क्यों , किसने, कहाँ, कौन  आदि पर ध्यान देना है।
और हाँ प्राचीन इतिहास के साहित्य और स्थापत्य कला को देखना बिल्कुल मत भूलिए।
विशेष नोट-: घटना चक्र पूर्वावलोकन अथवा पूर्व प्रश्न पत्र का अध्ययन आपका 80% काम कर देगा।

मध्यकालीन इतिहास

बात करें मध्यकालीन इतिहास की तो मध्यकालीन इतिहास में क्या छोड़ा जा सकता है और क्या नहीं इस बारे में स्वयं पेपर बनाने वाला भी असमंजस में रहता है इसलिए इतिहास के इस भाग का अध्ययन हमें पूर्ण रूप से करना होगा। क्योंकि इसमें कहाँ से और क्या पूछा जाएगा इस बात की चिंता छोडकर सब कुछ पढना है और कंठस्थ करना है।
क्या क्या पढना है ?
आपकी सुविधा के लिए सबसे महत्वपूर्ण से कम महत्वपूर्ण टॉपिक निम्नलिखित हैं
1-मुगल वंश
2- दिल्ली सल्तनत
3- भारत पर विदेशी आक्रमण
4- सूफी व भक्ति आन्दोलन
5- प्रांतीय (स्वतंत्र) राज्य
इस क्रम से मध्यकालीन इतिहास को देखें जिसमें तत्कालीन राजनीतिक आर्थिक और सामाजिक स्थिति का अध्ययन करें।
किस वंश की स्थापना किसने की , किसे किस उपनाम से जाना जाता है, किसने क्या कब और क्यों बनवाया,  किसने कौन सा कर लगाया,  किसकी कब्र कहाँ पर है, कौन किसके समकालीन था।
कुल मिलाकर सबकुछ।
पिछले वर्षों में आए प्रश्न रट लीजिए वह प्रश्न आए या न आए एक समझ जरूर विकसित हो जाएगी। कि कौन सा प्रश्न कैसे आता है क्या पढना है आदि।
ज्ञान प्रकाशन और किरण प्रकाशन की पतली सी किताबों में बडी ही अच्छी तरह से इतिहास को संकलित किया गया है । रट लीजिए।

आधुनिक इतिहास

और अंत में आधुनिक इतिहास कहने को तो यह सबसे कम समय का इतिहास है लगभग 300 वर्ष का किन्तु परीक्षा की दृष्टि से देखें तो यह अपेक्षाकृत सबसे बडा है पढने के लिहाज से और प्रश्नों के लिहाज से भी।
प्रारम्भिक परीक्षा में इतिहास में सबसे अधिक प्रश्न आधुनिक इतिहास से ही आते हैं उसमें भी स्वतंत्रता आन्दोलन में से अधिक
इस भाग के विषय में यदि यह कहूँ कि यह पढिए यह छोड़ दीजिए तो शायद मैं आपको धोखा दूंगा लेकिन स्मार्ट स्टडी तो करनी ही होगी।
सबसे पहले आप जितने भी वायसराय/गवर्नर हैं सबके कार्यकाल सहित उस काल में जितने भी क्रियाकलाप हुए हैं सबको कंठस्थ कर लीजिए 40% आधुनिक इतिहास तैयार हो जाएगा।
धार्मिक आन्दोलन से एक प्रश्न हर वर्ष आता है विशेष रूप से राजा राम मोहन रॉय , पढ लीजिए।
महात्मा गाँधी जी से जुड़े सभी तथ्य आपको याद होने चाहिए।
स्वतंत्रता संघर्ष के काल की पत्र- पत्रिकाऐं किसने लिखी कब लिखी , किसने कब किस संस्था की स्थापना की, किसने किसे किस नाम से संबोधित किया, किसने कौन सी उक्ति कही यह सब रट लीजिए ।
सभी क्रान्तिकारियों के सम्बंध में तथ्य एकत्रित करके याद कर लीजिए ।
यह सब करके आप परीक्षा के 90% प्रश्न हल कर सकते हैं।
घटना चक्र पूर्वावलोकन रटना अनिवार्य है
यदि किसी के पास वैकल्पिक इतिहास के प्रश्न पत्र की पुस्तक है जो तब की है ( जब सीसैट नहीं लागू था और सामान्य अध्ययन के साथ एक वैकल्पिक विषय का प्रावधान था ) तब उसे और कुछ पढने की आवश्यकता नहीं होगी वह किताब घोंट कर पी लीजिए 100% प्रश्न हल होंगे सम्पूर्ण इतिहास के।
धन्यवाद

समीक्षा अधिकारी की परीक्षा में सामान्य विज्ञान

समीक्षा अधिकारी के लिए सामान्य विज्ञान की तैयारी कैसे करें
How to prepare for General Science For RO ARO Examination 


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आशा है कि आप सब सिलेबस देख चुके हैं | दोस्तों समय बहुत कम है इसलिए हमें जो करना है जल्दी जल्दी करना है |
सिलेबस में जो सामान्य अध्ययन को पार्ट में जो पहला विषय आपने देखा होगा वह सामान्य विज्ञान है | समान्य विज्ञान उनके लिए तो सरल है जिनका विषय बारहवीं तक विज्ञान है किन्तु उन्हे बडी दिक्कत होती है जिन्होने बहुत पहले विज्ञान विषय को तिलान्जलि दे दी है |
इस विषय को छोडा नहीं जा सकता क्योंकि हमें परीक्षा में कम से कम पन्द्रह प्रश्न जरूर मिलेंगे |
तो हमें करना क्या होगा कि जल्दी से विज्ञान विषय को कवर कर सकें |



पहले हम यह देख लेते हैं कि पूर्व के वर्षों में कितने प्रश्न पूछे गऐ है
2001 - 9
2006 - 19
2010 - 17
2013 - 15
2014 - 14
अब आप समझ रहे होंगे कि यह परीक्षा पास करने में कितना महत्वकारी है | हो जाऐगा बस नीचे दिए तरीके से काम करना है
विज्ञान के लिए ल्युसेंट सामान्य विज्ञान बहुत अच्छी और पूर्ण रूप से लाभकारी पुस्तक है |



आपके पास है तो अच्छी बात है नहीं है तो सबसे पहला काम करिए जाकर खरीद लाइये |
इसके साथ साथ घटना चक्र की पूर्वावलोकन भी रखिए |
Ghana chakra purvavlokan

अब आपको एक दिन की मेहनत करनी है और यह देखना है कि प्रश्न किस प्रकार पूछे जाते है और किस किस टापिक से आता है |
सारे टापिक्स को एक जगह लिख लीजिए |
आपको कुछ टापिक्स ऐसे मिलेंगे जिससे आप अच्छी प्रकार परिचित होंगे और उसमें से कुछ पूछा जाए तो आप आराम से उत्तर दे सकते है इन पर अधिक ध्यान ना दीजिए लेकिन एक नजर देखिए जरूर |
अब दूसरा काम कि जो टापिक आपने नोट किऐ है पुस्तक में उन टापिक्स का अध्ययन करिए और साथ ही साथ महत्वपूर्ण बिन्दुओं को लिखते जाइये यह नोट्स आपको परीक्षा के अन्तिम समय में काम आएगा |


 भौतिक और जीव विज्ञान पर अधिक ध्यान दें | रसायन में बहुलक व खाद्य प्रसंस्करण को जरूर देखें एक प्रश्न निश्चित है |
कम्प्यूटर को अधिक समय ना दें क्योंकि इसमें एक प्रश्न ही आता है वह भी ऐसा कि कोई भी आराम से कर सकता है |
बस मेहनत ही एक तरीका है शार्टकट तो सफल होने के लिए आज तक बना ही नहीं |

आगे भी अन्य विषयों पर चर्चा होगी धीरे चलिए मगर सटीक चलिए |


धन्यवाद